बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मन्दिर की कहानी – कामना लिंग

बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा 

Baidyanath Dham Jyotirlinga Story In Hindi and important facts. Baidyanath dham is one of the twelve Jyotirlingas In Jharkhand, India

एक बार जब रावण ने शिव तपस्या करनी शुरु किया और सालों तक तपस्या करने के बाद शिव जी ने रावण को उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर मनोवांछित वरदान दिया | रावण ने भगवान शिव को कैलाश पर्वत से अपने साथ लंका ले जाने की इच्छा व्यक्त किया | भगवान शिव ने खुद लंका जाने से मना कर दिया, लेकिन अपने भक्त रावण को ज्योतिर्लिंग ले जाने की सलाह दी|

साथ ही शर्त लगा दी कि इसे अगर रास्ते में कहीं धरती पर रखा, तो यह वहीं स्थापित हो जाएगा, वहां से कोई उसे उठा नहीं पाएगा|

इधर, भगवान विष्णु नहीं चाहते थे कि ज्योतिर्लिंग लंका पहुंचे | उन्होंने गंगा माँ को रावण के पेट में समाने का अनुरोध किया |गंगा माँ जैसे ही रावण के पेट में समाई, रावण को तीव्र लघुशंका लगी |वह सोचने लगा कि किसको ज्योतिर्लिंग सौंपकर वह लघुशंका से निवृत्त हो |

उसी क्षण ग्वाले के वेश में भगवान विष्णु वहां प्रकट हुए | रावण ने ग्वाले को ज्योतिर्लिंग सौंप दिया और हिदायत दी कि जब तक वह न आए, तब तक ज्योतिर्लिंग को वह जमीन पर न रखे |

रावण लघुशंका करने लगा, गंगा माँ के प्रभाव से उसे निवृत्त होने में काफी देर लग गई | वह जब लौटा, तो ग्वाला ज्योतिर्लिंग को जमीन पर रखकर विलुप्त हो चुका था | इसके बाद रावण ने ज्योतिर्लिंग को उठाने की लाख कोशिश की, मगर सफल नहीं हो सका, उसे खाली हाथ लंका लौटना पड़ा |

बाद में सभी देवी-देवताओं ने आकर उस ज्योतिर्लिंग को विधिवत स्थापित किया और पूजा-अर्चना की |

इस ज्योतिर्लिग का नाम बैद्यनाथ कैसे पड़ा ?

काफी दिनों बाद बैजनाथ नामक एक चरवाहे को इस ज्योतिर्लिंग का दर्शन हुआ | वह प्रतिदिन इसकी पूजा करने लगा | इसी कारण इस ज्योतिर्लिग का नाम बैद्यनाथ हो गया |

बैद्यनाथ शिवलिंग कहा है ?

बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र बैद्यनाथ शिवलिंग झारखंड के देवघर में स्थित है | इस जगह को लोग बाबा बैजनाथ धाम के नाम से भी जानते हैं |

कहते हैं भोलेनाथ यहां आने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं |इसलिए इस शिवलिंग को ‘कामना लिंग’ भी कहते हैं |

बाबा बैद्यनाथ के धाम से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍य

  1. बाबा बैद्यनाथ का धाम भगवान शिव के 12 ज्‍योतिर्लिंगों में से एक है तथा द्वादश ज्‍योतिर्लिंग स्‍तोत्र में यह पांचवें स्‍थान पर हैं।
  2. इस ज्‍योतिर्लिंग को मनोकामना लिंग भी कहा जाता है।
  3. मान्‍यता है कि यह ज्‍योतिर्लिंग राक्षसराज रावण ने कैलास पर्वत पर घोर तपस्‍या के बाद इसे वरदान – स्‍वरूप प्राप्‍त किया था।
  4. बैद्यनाथ ज्‍योतिर्लिंग एकमात्र ऐसा ज्‍योतिर्लिंग है जहां शिव और शक्‍ति एक साथ विराजमान हैं।
  5. पुराणों के अनुसार सुदर्शन चक्र के प्रहार से यहीं पर मां शक्‍ति का हृदय कटकर गिरा था।
  6. बैद्यनाथ दरबार 51 शक्‍तिपीठों में से एक है।
  7. शिव और शक्‍ति के इस मिलन स्‍थल पर ज्‍योतिर्लिंग की स्‍थापना खुद देवताओं ने की थी।
  8. श्रावण मास में बैद्यनाथ ज्‍योतिर्लिंग का अभिषेक गंगाजल से किया जाता है।
  9. गंगाजल यहां से 105 किमी दूर सुल्‍तानगंज से लाई जाती कहते हैं कि यहां मांगी गई मनोकामना काफी देर में लेकिन पूरी जरूर होती है।
  10. देर से मनोकामना पूरी होने के कारण इसे दीवानी दरबार भी कहते हैं।
  11. भगवान श्रीराम और महाबली हनुमान ने भी श्रावण मास के दौरान यहां कांवर यात्रा की थी।
  12. शिव पुराण और पद्मपुराण के पातालखंड में इस ज्‍योतिर्लिंग की महिमा गायी गई है ।

बैद्यनाथ धाम (देवघर )

देवघर का शाब्दिक अर्थ है देवी-देवताओं का निवास स्थान। देवघर में बाबा भोलेनाथ का अत्यन्त पवित्र और भव्य मन्दिर स्थित है। हर साल सावन के महीने में स्रावण मेला लगता है जिसमें लाखों श्रद्धालु “बोल-बम!” “बोल-बम!” का जयकारा लगाते हुए बाबा भोलेनाथ के दर्शन करने आते है। ये सभी श्रद्धालु सुल्तानगंज से पवित्र गंगा का जल लेकर लगभग सौ किलोमीटर की अत्यन्त कठिन पैदल यात्रा कर बाबा को जल चढाते हैं।

बैद्यनाथ धाम की पवित्र यात्रा श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) में शुरु होती है। सबसे पहले तीर्थ यात्री सुल्तानगंज में एकत्र होते हैं जहाँ वे अपने-अपने पात्रों में पवित्र गंगाजल भरते हैं। इसके बाद वे गंगाजल को अपनी-अपनी काँवर में रखकर बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ की ओर बढ़ते हैं। पवित्र जल लेकर जाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि वह पात्र जिसमें जल है, वह कहीं भी भूमि से न सटे।